शुक्रवार 24 जुलाई 2026 - 12:36
शहीद सुप्रीम लीडर के खून का बदला केवल भावनात्मक या अस्थायी प्रतिक्रिया का नाम नहीं: हुज्जतुल इस्लाम मेहदी गरामीपुर

अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन "वादा-ए-इंतकाम की पूर्ति" का समापन समारोह इस्लामी सांस्कृतिक एवं वैचारिक शोध संस्थान के अल्लामा जाफ़री (र) हॉल में आयोजित हुआ, जिसमें विभिन्न धर्मों के बुद्धिजीवियों ने भाग लिया।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन "वादा-ए-इंतकाम की पूर्ति" का समापन समारोह इस्लामी सांस्कृतिक एवं वैचारिक शोध संस्थान और हौज़ा कॉम्प्लेक्स इमाम रज़ा (अ) के संयुक्त आयोजन से, जबकि देश के कई वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संस्थानों के सहयोग से, इस्लामी सांस्कृतिक एवं वैचारिक शोध संस्थान के अल्लामा जाफ़री (र) हॉल में आयोजित हुआ।

इस अवसर पर सम्मेलन के वैज्ञानिक सचिव हुज्जतुल इस्लाम मेहदी गरामीपुर ने बताया कि यह सम्मेलन मशहद, क़ुम और तेहरान में भी आयोजित किया गया था और इसे हौज़ा एवं विश्वविद्यालयों के विद्वानों तथा विभिन्न धार्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक केंद्रों की ओर से व्यापक समर्थन मिला।

उन्होंने आगे कहा कि इस सम्मेलन के वैज्ञानिक और शोध सत्रों में "इंतकाम" और "इमाम-ए-शहीद के खून के बदले" के विभिन्न पहलुओं का क़ुरआन, अहलेबैत (अलैहिमुस्सलाम) की रिवायतों और हदीसों तथा ऐतिहासिक स्रोतों की रोशनी में व्यापक अध्ययन करने का प्रयास किया गया।

इंतकाम की चर्चा केवल भावनात्मक या अस्थायी प्रतिक्रिया का नाम नहीं

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन "वादा-ए-इंतकाम की पूर्ति" ने यह स्पष्ट करने का प्रयास किया कि इंतकाम का विषय केवल भावनात्मक, संवेदनात्मक या उत्तेजनापूर्ण मुद्दा नहीं है, बल्कि इसकी बुनियाद पवित्र क़ुरआन और अहलेबैत (अ) की शिक्षाओं में भी मौजूद है।

हुज्जतुल इस्लाम मेहदी गरामी ने कहा कि इंतकाम एक नियमबद्ध और बहुआयामी विषय है। इसे केवल फ़िक़्ही या केवल सैद्धांतिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जा सकता, बल्कि ईश्वरीय दृष्टिकोण, शहीद के खून की पवित्रता और सम्मान, सभ्यतागत दृष्टिकोण तथा दुश्मनों के सामने पीछे न हटने जैसे विभिन्न पहलुओं से इसका अध्ययन आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि शहीद सुप्रीम लीडर का खून इस्लामी उम्मत में जागरूकता पैदा करने और प्रतिरोध के मोर्चे को मजबूत बनाने का माध्यम बन सकता है।

उन्होंने आगे कहा कि इस सम्मेलन का निष्कर्ष यह था कि इस्लामी दृष्टिकोण में इंतकाम, लापरवाही और केवल भावनात्मक कार्रवाई से बिल्कुल अलग है। इसका दायरा क़ुरआन, धार्मिक सिद्धांतों, फ़िक़्ही नियमों, ऐतिहासिक प्रमाणों और नैतिक मूल्यों के आधार पर निर्धारित होता है। हर अपराध के जवाब को हिंसा नहीं कहा जा सकता। इसी तरह इमाम-ए-शहीद के खून का न्याय और उसका अनुसरण अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों तथा अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के नियमों के अनुसार भी जांच का विषय हो सकता है।

"वादा-ए-इंतकाम" की पूर्ति किसी एक कार्रवाई या एक क्षण तक सीमित नहीं

अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन "वादा-ए-इंतकाम की पूर्ति" के वैज्ञानिक सचिव ने कहा कि इस सम्मेलन के महत्वपूर्ण परिणामों में न्याय की मांग को जारी रखना और रमज़ान युद्ध के दौरान किए गए अपराधों के संबंध में अंतरराष्ट्रीय अदालतों और वैश्विक संस्थाओं में कानूनी कार्रवाई करना भी शामिल है।

उन्होंने कहा कि इंतकाम के वादे की पूर्ति किसी एक कार्रवाई या एक समय में सीमित नहीं होती, बल्कि यह एक क्रमिक, निरंतर और धैर्य एवं दृढ़ता पर आधारित प्रक्रिया है।

उन्होंने आगे कहा कि इंतकाम और शहीद के खून का बदला कब और किस तरीके से लिया जाए, इसका निर्णय धार्मिक औचित्य, जनसमर्थन और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए।

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